Monday, 20 April 2015

बेटा/बेटी यह मत करो, वो मत करो, आज तुम्हे बाहर खेलने नहीं जाना है, उन लड़को के साथ नहीं खेलना है आज स्कूल जरूर जाना है और ना जाने क्या क्या जो आपको बचपन से लेकर उम्र के उस दौर तक संस्कारो के नाम पर सलाह और नसीहतें मिलती रहती हैं जब तक आप सफलता के उस मुकाम पर ना पहुँच जाएँ जहाँ आपके परिजन आपको देखना चाहतें हो। लेकिन हमें तो अपने परिजनों/गुरुजनों की बताई उनकी तानाशाही लगती हैं लेकिन जब कभी भी आप जिंदगी में फेल होते हैं तो आपको सबसे पहले अपने परिजनों और गुरुजनों की ही याद आती है और सोचते हैं की काश हमने अपने परिजनों की कही बातों पर अमल किया होता तो हमें फेल ना होना पड़ता। इसीलिये जिंदगी के इम्तिहानों को पास करने में हमें हमारे महापुरुषों, परिजनों और गुरुजनो की उन बातों को अपने चरित्र में जरूर उतारना चाहिए जो कभी आपको उनकी तानाशाही लगती हो।